पल्लवन
#पल्लवन
सृष्टि में एक शब्द सर्वत्र व्याप्त है #टूटना।
एक अदृश्य प्रलयंकारी शक्ति जिसकी विभीषिका एक नये आयाम की ओर अग्रसर है, के प्रकोप से लगभग त्राहि-त्राहि मची हुई है।
कोई परिजनों के महाप्रयाण से शोकाकुल है तो कोई अपनी खण्ड खण्ड होती आजीविका से टूट चुका है।
कोई संयोग से टूट रहा है, कोई वियोग से टूट रहा है।
मै स्वयं हाल ही में एक अत्यंत विषम परिस्थिति से बाहर आने की कोशिश में हूँ। केंद्र से निकल कर परिधि तक आ चुका हूँ, बस मुक्त होना शेष है।
परन्तु अबतक मेरा तज़ुर्बा यह कहता कि टूटना हो, विखण्डन हो, या कैसा भी विरह हो, वह सृजन का एक नवीन आयाम प्रस्तुत करता है।
गौरतलब है वृक्ष की एक टहनी के टूट जाने से वृक्ष वीरान नहीं होता, अपितु उसके पादबिन्दु से नयी कोपलें प्रस्फुटित हो जाती है, और एक नया वृक्ष तैयार हो जाता है।
गौरतलब है बादलों के संघनन के पश्चात टूटने या विखण्डन की प्रक्रिया से वर्षा के अमृतबिन्दु समस्त धराधाम को तृप्त करते हैं।
गौरतलब है कि एक बीज जमीन की गहराइयों में दफ़्न होने के बाद टूटता है, और फिर उससे अंकुरण बाहर आता है, नवजीवन का मार्ग प्रशस्त करता है।
गौरतलब है कि अंडे के अंदर भरे जीवद्रव्य से जीवन निर्माण की प्रक्रिया अवश्य आरम्भ होती है परन्तु भौतिक जीवन का प्रारम्भ उसके आवरण को तोड़कर ही शुरू होता है।
ग़ौरतलब है कि माटी के जटिल ढेलों को ऋजु कणों में तोड़कर ही उसमे कृषि की जाती है।
गौरतलब है कि नवजात के बाह्य जीवन का प्रारम्भ गर्भनाल के विग्रह से प्रारम्भ होता है।
गौरतलब है कि वृक्षों में नये पत्ते तभी आते हैं , जब पुराने पत्ते टूट जाते हैं।
ध्यातव्य है क़ि ये सभी प्रक्रियाएं लघुकालिक न होकर, दीर्घकालिक हैं। फिर सृजन तो सदा से ही दीर्घकालिक रहा है। इसलिए ऐसे किसी भी दैहिक-दैविक-भौतिक प्रकोप से प्रभावित- अप्रभावित समस्त स्नेहिल स्वजन! मतिधीर रहिये।
वियोग कैसा भी हो, विरह कैसा भी हो, वह प्राणिमात्र को संवेदनशील बनाता है,परन्तु उसके बाद की मनोदशा अस्थायी होती है। ऐसी ही स्थिति को #टूटना कहते हैं।
विग्रह के बाद व्यक्ति को तटस्थ हो जाना चाहिए। जिस प्रकार नदी की धारा में बहता हुआ जल वापस नहीं आ सकता, उसी प्रकार गुजरा हुआ सजीव निर्जीव जिसके प्रति आशक्ति है, वापस नहीं आ सकता।
निःसन्देह वक्ता के लिए बोलना सरल है, लेखक के लिए लिखना सहज है, परन्तु अनुकरण करना कठिन है, कठिन परिस्थितियों में तो बिल्कुल।
परन्तु यकीन कीजिये जब आप स्वयं को टूटा हुआ महसूस करें, इसे अन्यथा न लें, निराश न हों, यह पूर्ण सत्य है कि ईश्वर सृष्टि के नवनिर्माण की कड़ी में आपको निमित्त बनाना चाहता है। वह आपको सूत्रधार बनाकर सृजन का एक नया आयाम गढ़ना चाहता है, जिसे हमसब एक नया नाम देंगे.....#पल्लवन
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