पैर_और_पाज़ेब (कथा)
पैर और पाज़ेब (कथा) सेठ श्यामलदास प्रयागराज के रहीस लोगों के से एक हैं, किंतु पैसों का रौब उन्हें छूकर भी न था। वर्षों पहले सेठ की इकलौती बेटी ३ वर्ष की वय में ननिहाल रणकपुर के मेले मे खो गई थी, और उसकी मनोवेदना में उनकी पत्नी भी चल बसीं। आज लगभग एक दशक बाद प्रयागराज के मीरगंज की हवेली में जश्न का माहौल था। और माहौल हो भी क्यों न....? आज सेठ श्यामलदास के इकलौते दत्तक पुत्र #किशोर का २१वां जन्मदिवस जो था। हवेली के बीचों बीच एक ऊंचे चबूतरे पर कुछ नर्तकियों के पैर ठोलक और तबले की थापों को चुनौती दे रहे थे। देखने वालों की भीड़ कम न था, वर्ग के हिसाब से बैठक व्यवस्था बढ़ते क्रम से सजाई गई थी। पूरा आंगन खचाखच भरा हुआ था। अचानक दरबान हाज़िर हुआ, " मालिक! कोठी से संदेशा आया है, ख...