सभी गम भूल कर तुम मुस्कुराओ। इसी मुस्कान में कुर्बान हूँ मैं......(ग़ज़ल )
ग़ज़ल
सभी
गम भूल कर तुम मुस्कुराओ।
इसी
मुस्कान में कुर्बान हूँ मैं।
जहां
की कशमकश को छोडकर तुम पास आओ।
इसी
जद्दोजहद में तो हैरान हूँ मै।।
मुझसे
कहते हो क़ि साहब खुदा का खौफ़ खाओ।
ख़त
में लिखते हो तुम्हारी जान हूँ मै।।
जहाँ
ये जानता है जानकर न शरमाओ।
बहुत
कुछ लाजमी है और परेशान हूँ मै।
कई
अरसे हुए दीदार के अब आ जाओ।
तुम्हे
मालूम है दिल का बड़ा दीवान हूँ मैं।।
न
इतराओ सनम इनकार कर के।
फ़िदा
थे तुम वही इनसान हूँ मैं ।
हो
गयी रात वही चाँद अधूरा निकला,
मौन
है कितने जमाने से ,वही तान हूँ मैं।
रंग
दुनिया के सभी आज भी फ़ीके निकले।
रंग-ए-सादगी
में रंग गया बयान हूँ मैं।।
क्या
हुआ आज फकत सुर्खियाँ रहीं बाकी।
चर्चे
आम है जिसके वही जुबान हूँ मैं।।
है
अगर आज दिल्लगी में मेरी तू सहमत।
रखूँ
खण्डहर में भी चराग़ यही ठान लूँ मैं।।
बड़ी
सिद्दत से मिली है ये दो पल की मोहलत।
जरा
करीब आ ढंग से तुझे पहचान लूँ मैं।।
#विक्रम_मिश्र
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