तुम अपने आशियाने में जरा सा झांक कर देखो.........(गज़ल)


                                   गज़ल

तुम अपने आशियाने में जरा सा झांक कर देखो,

तुम्हारी ही निगाहों में तो ये संसार फैला है।
तुम्हारी सोच कैसी है,ये कोई और क्या जाने,
तुम्ही कहते हो अब यह आइना-ए-शक्ल मैला है।

मुंडेरों पर नजर डालो जहाँ की रंग रलियों में,

बिना सोचे बिना समझे , अभी तक खून फैला है।
तुमने ही तो फैलाई जहाँ में मज़हबी चादर,
कहीं इस्लाम फैला है , कहीं पर राम फैला है........





      



                         

Comments

Popular posts from this blog

अलग चादर बना मौला जिसे दरगाह पर तेरी, चढ़ाऊँ मै तो अस्मत मुल्क की महफ़ूज़ हो जाये........ (ग़ज़ल)

बघेली-कविता 2

श्रृंगार-मुक्तक