आइना झूठ नजरों से कहता नही। यार नजरें मिलाने को दिल चाहिए........(ग़ज़ल)
ग़ज़ल
आइना
झूठ नजरों से कहता नही।
यार
नजरें मिलाने को दिल चाहिए।।
हार
या जीत का फैसला क्या सही,
चाँद
मस्जिद में लाने को दिल चाहिए।
यूँ
तो अहले जहाँ में अलग राग है,
गीत
तक गुनगुनाने को दिल चाहिए।
आज
की बाजियों में वो रंगत नही,
मोहरे
भी हिलाने को दिल चाहिए।।
ख़त
लिफाफों में रखने से क्या फ़ायदा,
नाम
पढ़कर सुनाने को दिल चाहिए।।
गीत
मीरा का हो, तान राधा की हो।
साथ
बंसी बजाने को दिल चाहिए।।
चाँद
पूनम का हो, या अमावस का हो।
रात
को दिन बनाने को दिल चाहिए।।
साज
टूटे हुए सुर में गाये तो क्या,
आह
भरकर सुनाने को दिल चाहिए।।
मैकदे
के चरागों में रोशन हुए,
जाम
खुलकर पिलाने को दिल चाहिए।
साथ
करना अमूमन सरल बात है,
साथ
हरदम निभाने को दिल चाहिए।
ताज
पाना जहाँ की गज़ब रीत है,
ताज
को सर बनाने को दिल चाहिए।
#vk_poetry
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